अजमेर: राजस्थान के अजमेर स्थित विश्व प्रसिद्ध ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती दरगाह से जुड़े कथित 20 लाख रुपये के गबन मामले में पुलिस ने पूर्व सचिव और एक ठेकेदार के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि वर्ष 2018 के उर्स मेले के दौरान दिए गए देग (लंगर) ठेके से संबंधित राशि में वित्तीय अनियमितता की गई और करीब 20 लाख रुपये का हिसाब नहीं दिया गया।
पुलिस के अनुसार, देग ठेका करीब 3.77 करोड़ रुपये में दिया गया था। जांच में सामने आया कि ठेकेदार ने लगभग 1.05 करोड़ रुपये बैंक के माध्यम से और नकद जमा कराए, लेकिन शेष करीब 20 लाख रुपये जमा नहीं किए गए। इस मामले में पूर्व सचिव और ठेकेदार पर गबन और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि मामले से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज भी गायब हैं, जिससे जांच और गंभीर हो गई है। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है और संबंधित वित्तीय रिकॉर्ड व दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही है।
प्रशासन का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की वित्तीय लेन-देन और दस्तावेजों की जांच कर रही है।
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