आज के समय में लोग अपनी सेहत को लेकर पहले की तुलना में अधिक सतर्क हो गए हैं। हल्की-फुल्की परेशानी होने पर भी कई लोग बिना डॉक्टर की सलाह के ब्लड टेस्ट या फुल बॉडी हेल्थ चेकअप पैकेज बुक करा लेते हैं। वहीं, कुछ लोग हर तीन या छह महीने में पूरे शरीर की जांच कराना अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना चुके हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या पूरी तरह स्वस्थ व्यक्ति के लिए भी हर साल फुल बॉडी चेकअप कराना जरूरी है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति पूरी तरह स्वस्थ है, तो उसे बार-बार फुल बॉडी चेकअप कराने की आवश्यकता नहीं होती। हालांकि, साल में एक बार कुछ जरूरी स्वास्थ्य जांच जरूर करानी चाहिए। कौन-कौन से टेस्ट कराए जाएं, यह व्यक्ति की उम्र, जीवनशैली, पारिवारिक बीमारी के इतिहास और स्वास्थ्य जोखिम (Risk Profile) पर निर्भर करता है।
साल में एक बार कराएं ये जरूरी टेस्ट
विशेषज्ञों का मानना है कि स्वस्थ व्यक्ति को वर्ष में कम से कम एक बार कुछ बेसिक हेल्थ टेस्ट जरूर कराने चाहिए। इनमें शामिल हैं—
- ब्लड प्रेशर (Blood Pressure)
- ब्लड शुगर (Blood Glucose)
- लिपिड प्रोफाइल (कोलेस्ट्रॉल जांच)
- लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT)
- किडनी फंक्शन टेस्ट (KFT)
- थायरॉइड प्रोफाइल
- हीमोग्लोबिन टेस्ट (एनीमिया की जांच)
- विटामिन D और विटामिन B12 की जांच
इन जांचों से शरीर में होने वाली कई समस्याओं का शुरुआती चरण में ही पता लगाया जा सकता है, जिससे समय रहते इलाज शुरू करना आसान हो जाता है।
ब्लड टेस्ट के अलावा ये जांच भी हैं जरूरी
विशेषज्ञों के मुताबिक, केवल ब्लड टेस्ट ही पर्याप्त नहीं हैं। समय-समय पर चेस्ट एक्स-रे और पेट का अल्ट्रासाउंड भी कराया जा सकता है। अल्ट्रासाउंड के जरिए लिवर, किडनी, पित्ताशय और पेट के अन्य अंगों की स्थिति का पता चलता है। इससे फैटी लिवर जैसी समस्याओं की भी शुरुआती पहचान संभव हो सकती है।
किन लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत?
जिन लोगों का वजन अधिक है या जो मोटापे से जूझ रहे हैं, उन्हें नियमित स्वास्थ्य जांच करानी चाहिए क्योंकि मोटापा कई गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ाता है। वहीं, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या अन्य पुरानी बीमारियों से पीड़ित लोगों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार समय-समय पर जांच कराते रहना चाहिए, ताकि बीमारी नियंत्रण में रहे और किसी जटिलता से बचा जा सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि बिना जरूरत बार-बार टेस्ट कराने के बजाय संतुलित जीवनशैली, नियमित व्यायाम, पौष्टिक आहार और डॉक्टर की सलाह के अनुसार समय पर जरूरी जांच कराना ही बेहतर विकल्प है।
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