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Jharkhand: सरायकेला में 16 जुलाई को निकलेगी भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा, पुरी की तर्ज पर होंगी विशेष तैयारियां

सरायकेला: झारखंड के सरायकेला में भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। नगर क्षेत्र में साफ-सफाई के साथ-साथ महाप

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admin
2026-07-05
Jharkhand: सरायकेला में 16 जुलाई को निकलेगी भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा, पुरी की तर्ज पर होंगी विशेष तैयारियां
Jharkhand: सरायकेला में 16 जुलाई को निकलेगी भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा, पुरी की तर्ज पर होंगी विशेष तैयारियां

सरायकेला: झारखंड के सरायकेला में भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। नगर क्षेत्र में साफ-सफाई के साथ-साथ महाप्रभु के नंदीघोष रथ को आकर्षक स्वरूप देने का काम तेजी से चल रहा है। ओडिशा से आए कुशल कारीगर दिन-रात मेहनत कर रथ को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। इस वर्ष 16 जुलाई को निकलने वाली रथयात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है।

श्री श्री जगन्नाथ सेवा समिति के अनुसार, इस बार रथयात्रा का आयोजन जगन्नाथ पुरी की तर्ज पर भव्य रूप से किया जाएगा। भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ श्रीमंदिर से मौसीबाड़ी के लिए प्रस्थान करेंगे। यात्रा के दौरान धार्मिक अनुष्ठान, भजन-कीर्तन और शोभायात्रा का आयोजन होगा। पहले दिन गोपबंधु चौक पर भगवान का रात्रि विश्राम होगा, जबकि 17 जुलाई को रथ मौसीबाड़ी पहुंचेगा।

समिति के अध्यक्ष राजेंद्र महांती (लिपू महांती) ने बताया कि इस वर्ष रथयात्रा में ओडिसी नृत्य, घंटा पार्टी और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की प्रस्तुति विशेष आकर्षण का केंद्र होगी। उन्होंने बताया कि महिला और पुरुष श्रद्धालुओं को समान रूप से रथ खींचने का अवसर दिया जाएगा, जिससे अधिक से अधिक लोग इस धार्मिक आयोजन का हिस्सा बन सकें।

समिति के अनुसार, पिछले वर्ष लगभग 20 लाख रुपये की लागत से तैयार किए गए नंदीघोष रथ का इस बार पुनः उपयोग किया जा रहा है। रथयात्रा के बाद इसे सुरक्षित रखा गया था और अब इसकी मरम्मत तथा आकर्षक सजावट के बाद दोबारा यात्रा के लिए तैयार किया गया है।

धार्मिक कार्यक्रमों की शुरुआत 14 जुलाई को आयोजित होने वाले नेत्रोत्सव से होगी, जिसमें वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। 15 जुलाई को भगवान विश्राम करेंगे और 16 जुलाई को भव्य रथयात्रा का शुभारंभ होगा। सात दिनों तक मौसीबाड़ी में प्रवास के बाद 24 जुलाई को बाहुड़ा रथयात्रा निकाली जाएगी। वापसी के दौरान कालूराम चौक पर भगवान का रात्रि विश्राम होगा और 25 जुलाई को वे पुनः श्रीमंदिर पहुंचेंगे, जहां विधि-विधान के साथ रथयात्रा का समापन किया जाएगा।

समिति ने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में रथयात्रा में शामिल होने की अपील की है। धार्मिक आस्था, पारंपरिक संस्कृति और भक्ति के संगम के रूप में सरायकेला की यह रथयात्रा हर वर्ष हजारों श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है और इस बार भी आयोजन को लेकर पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल है।

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