बिहार। वैशाली जिले में तीन दशक से अधिक पुराने आपराधिक मामले में अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए पांच आरोपियों को दोषी करार दिया है। वर्ष 1992 में हुई गोलीबारी की घटना से जुड़े इस मामले में करीब 34 साल बाद न्यायालय ने सजा का ऐलान किया। फैसले को न्याय प्रक्रिया में एक अहम पड़ाव माना जा रहा है।
वैशाली जिले के जुरवनपुर थाना क्षेत्र में वर्ष 1992 में हुई गोलीबारी की घटना के मामले में अदालत ने लंबी सुनवाई के बाद अपना निर्णय सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे-1) की अदालत ने पांच आरोपियों को दोषी पाते हुए उन्हें अलग-अलग अवधि की सजा सुनाई।
अभियोजन पक्ष के अनुसार घटना उस समय हुई थी जब एक व्यक्ति अपने घर पर मौजूद था। इसी दौरान उसे सूचना मिली कि कुछ लोग उसके घर आने-जाने वाले रास्ते पर अवरोध पैदा कर रहे हैं। विरोध करने पर विवाद बढ़ गया और आरोपियों ने कथित रूप से उस पर गोली चला दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, चिकित्सीय रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजी साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए। जांच पूरी होने के बाद आरोप पत्र दाखिल किया गया और मुकदमा न्यायालय में चला।
बताया गया कि इस मामले में शुरुआत में कुल नौ लोगों को आरोपी बनाया गया था। हालांकि मुकदमे की लंबी अवधि के दौरान चार आरोपियों की मृत्यु हो गई, जबकि शेष पांच आरोपियों के खिलाफ सुनवाई जारी रही। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर सभी पांच आरोपियों को दोषी ठहराया।
सजा सुनाते हुए न्यायालय ने एक 84 वर्षीय दोषी को उनकी आयु को ध्यान में रखते हुए तीन वर्ष के कारावास की सजा दी तथा उन्हें कानूनी प्रावधानों के तहत राहत प्रदान की। वहीं अन्य चार दोषियों को 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास के साथ 25-25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।
अभियोजन पक्ष का कहना है कि इस फैसले ने यह संदेश दिया है कि गंभीर अपराधों के मामलों में न्याय मिलने में समय भले लगे, लेकिन कानून की प्रक्रिया अंततः अपने निष्कर्ष तक पहुंचती है। न्यायालय के इस निर्णय का स्थानीय स्तर पर स्वागत किया गया है।
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