राजस्थान में पंचायत चुनाव से पहले अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण को लेकर राज्य सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। ओबीसी आयोग जल्द ही प्रदेशभर में डोर-टू-डोर सर्वे शुरू करेगा, जिसके माध्यम से सामाजिक, आर्थिक और जनसंख्या संबंधी आंकड़े एकत्र किए जाएंगे। आयोग की रिपोर्ट के आधार पर पंचायत चुनावों में आरक्षण की रूपरेखा तय की जाएगी।
सरकार की योजना है कि सर्वे पूरी तरह पारदर्शी तरीके से किया जाए। इसके लिए आधुनिक तकनीक और मोबाइल एप का भी उपयोग किया जा सकता है, ताकि प्रत्येक परिवार का डेटा सही और प्रमाणिक रूप से दर्ज हो सके। सर्वे पूरा होने के बाद आयोग अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगा, जिसके आधार पर ओबीसी आरक्षण का अंतिम निर्धारण किया जाएगा।
राजस्थान में पंचायत चुनावों की प्रक्रिया फिलहाल ओबीसी आरक्षण रिपोर्ट पर निर्भर मानी जा रही है। राज्य निर्वाचन आयोग का कहना है कि आरक्षण संबंधी प्रक्रिया पूरी होने और सरकार की अधिसूचना जारी होने के बाद ही चुनाव कार्यक्रम घोषित किया जा सकेगा। आयोग ने चुनाव संपन्न कराने के लिए पर्याप्त समय की आवश्यकता भी जताई है।
राजनीतिक हलकों में भी इस मुद्दे को लेकर चर्चाएं तेज हैं। विपक्ष चुनाव में देरी को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप वैज्ञानिक और तथ्यात्मक सर्वे कराकर ही आरक्षण तय किया जाएगा, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का कानूनी विवाद न हो।
Enjoying this post?
Subscribe to Janhitmail to get deep dives like this delivered directly to your inbox .