बिहार: राज्य सरकार ने आपराधिक मामलों के शीघ्र निपटारे और न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार जल्द ही राज्य में 100 नए फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू करने जा रही है। इस निर्णय की जानकारी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए साझा की। सरकार का कहना है कि इस पहल से वर्षों से लंबित गंभीर आपराधिक मामलों की सुनवाई में तेजी आएगी और पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सकेगा।
सरकार के अनुसार, प्रस्तावित फास्ट ट्रैक कोर्ट उन मामलों पर विशेष रूप से ध्यान देंगे जिनमें लंबे समय से सुनवाई लंबित है। इनमें हत्या, दुष्कर्म, महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराध, घरेलू हिंसा, लैंगिक हिंसा तथा पॉक्सो (POCSO) अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई की जाएगी। इसके अलावा एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम से जुड़े मामलों और अन्य गंभीर आपराधिक मामलों का भी इन विशेष अदालतों में तेजी से निपटारा किया जाएगा।
सरकार का मानना है कि नए फास्ट ट्रैक कोर्ट शुरू होने से सामान्य अदालतों पर बढ़ते मामलों का दबाव कम होगा। इससे लंबित मुकदमों की संख्या घटाने में मदद मिलेगी और न्यायिक प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज और प्रभावी बन सकेगी। अधिकारियों का कहना है कि अपराधियों को समय पर सजा मिलने से कानून का भय बढ़ेगा, जिससे अपराधों पर नियंत्रण स्थापित करने में भी सहायता मिलेगी।
हालांकि, सरकार ने 100 फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू करने की पुष्टि की है, लेकिन फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि ये अदालतें कब से कार्य करना शुरू करेंगी और राज्य के किन जिलों में इन्हें स्थापित किया जाएगा। सरकार का कहना है कि स्थान और संचालन की समयसीमा से संबंधित निर्णय आगे की प्रक्रिया के दौरान लिए जाएंगे।
फास्ट ट्रैक कोर्ट विशेष प्रकार के मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए गठित किए जाते हैं। इन अदालतों में मामलों की नियमित और प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई की जाती है ताकि फैसलों में अनावश्यक देरी न हो। प्रत्येक फास्ट ट्रैक कोर्ट का कार्यक्षेत्र उसके गठन के उद्देश्य के अनुसार तय किया जाता है। राज्य सरकार का उद्देश्य न्याय प्रणाली को अधिक तेज, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना है, जिससे आम लोगों का न्यायपालिका और कानून-व्यवस्था पर विश्वास और मजबूत हो सके।
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