बिज़नेस

त्योहारी सीजन से पहले महंगाई का झटका, चीनी-चावल के बढ़े दाम

नई दिल्ली।  त्योहारी सीजन शुरू होते ही आम लोगों पर महंगाई की मार और तेज हो गई है। चीनी और चावल जैसी रोजमर्रा की जरूरी खाद्य वस्तुओं के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, ज

AD
admin
2026-08-04
त्योहारी सीजन से पहले महंगाई का झटका, चीनी-चावल के बढ़े दाम
त्योहारी सीजन से पहले महंगाई का झटका, चीनी-चावल के बढ़े दाम

नई दिल्ली।  त्योहारी सीजन शुरू होते ही आम लोगों पर महंगाई की मार और तेज हो गई है। चीनी और चावल जैसी रोजमर्रा की जरूरी खाद्य वस्तुओं के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। कमजोर मानसून, वैश्विक बाजार की अनिश्चितता और जमाखोरी को कीमतों में तेजी की प्रमुख वजह माना जा रहा है।

देशभर में खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी का सिलसिला जारी है। उपभोक्ता मामलों के विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक महीने में चीनी की थोक कीमतों में पांच फीसदी से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। औसत थोक भाव बढ़कर 4,593 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। वहीं, खुदरा बाजार में चीनी का औसत मूल्य 47.11 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 49.53 रुपये प्रति किलो हो गया है। पिछले एक साल में भी चीनी की कीमतों में करीब 7.64 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

चावल की कीमतों में भी लगातार उछाल देखने को मिल रहा है। देश में चावल का औसत खुदरा मूल्य एक महीने पहले 44.13 रुपये प्रति किलो था, जो अब बढ़कर 45.13 रुपये प्रति किलो पहुंच गया है। खासकर आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और केरल जैसे राज्यों में चावल के दाम 10 से 15 फीसदी तक बढ़ गए हैं। इसका सीधा असर परिवारों के मासिक राशन खर्च पर पड़ रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि कमजोर मानसून, अल-नीनो का प्रभाव और कई क्षेत्रों में कम वर्षा के कारण फसलों का उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। वहीं, कुछ स्थानों पर जमाखोरी की वजह से खुले बाजार में आपूर्ति कम हो गई है, जिससे कीमतों पर अतिरिक्त दबाव बना है।

एक नीति अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि यदि अल-नीनो के कारण चावल उत्पादन में बड़ी गिरावट आती है और कई देश बड़े पैमाने पर भंडारण शुरू कर देते हैं, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में चावल की कीमतें 30 से 50 फीसदी तक बढ़ सकती हैं। इसका असर भारत समेत कई देशों के उपभोक्ताओं पर पड़ने की संभावना है।

चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में पुराने स्टॉक का कम होना और गन्ने का एक हिस्सा इथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल होना भी प्रमुख कारण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले त्योहारों में मिठाइयों, बेकरी उत्पादों और अन्य खाद्य पदार्थों की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है।

इधर, वैश्विक बाजार में तांबे की कीमतें भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। लंदन मेटल एक्सचेंज में तांबे का तीन महीने का वायदा भाव 13,842 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गया। चिली में बाढ़, बर्फबारी और खदानों में उत्पादन प्रभावित होने के साथ-साथ डाटा सेंटर और बिजली ढांचे की बढ़ती मांग ने कीमतों को और ऊपर पहुंचा दिया है। इसके चलते आने वाले समय में इलेक्ट्रॉनिक सामान, वाहन और घरेलू उपकरण भी महंगे हो सकते हैं।

Enjoying this post?

Subscribe to Janhitmail to get deep dives like this delivered directly to your inbox .

AD

admin

Editor in Chief

Janhitmail Editorial Team & Administrator.

More from Janhitmail

No other posts found.