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बांकीपुर उपचुनाव: महागठबंधन में सीट को लेकर खींचतान, राजद और कांग्रेस आमने-सामने

पटना: बिहार की बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर महागठबंधन में सीट बंटवारे पर विवाद गहरा गया है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और कांग्रेस दोनों ने इस सीट पर अपना दा

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admin
2026-07-06
बांकीपुर उपचुनाव: महागठबंधन में सीट को लेकर खींचतान, राजद और कांग्रेस आमने-सामने
बांकीपुर उपचुनाव: महागठबंधन में सीट को लेकर खींचतान, राजद और कांग्रेस आमने-सामने

पटना: बिहार की बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर महागठबंधन में सीट बंटवारे पर विवाद गहरा गया है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और कांग्रेस दोनों ने इस सीट पर अपना दावा पेश कर दिया है, जिससे गठबंधन के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। उपचुनाव से पहले शुरू हुई यह खींचतान अब बिहार की राजनीति में चर्चा का विषय बनी हुई है।

कांग्रेस, जिसने पहले जन सुराज पार्टी को समर्थन देने के संकेत दिए थे, अब खुद बांकीपुर सीट से चुनाव लड़ने का दावा कर रही है। वहीं राजद ने भी स्पष्ट कर दिया है कि वह इस सीट से अपना उम्मीदवार उतारेगी।

राजद के प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी को बांकीपुर सीट पर करीब 44 हजार वोट मिले थे। ऐसे में यह सीट राजद के लिए मजबूत राजनीतिक आधार वाली सीट है और पार्टी यहां अपना प्रत्याशी उतारेगी।

दूसरी ओर, कांग्रेस के प्रवक्ता असित नाथ तिवारी ने बांकीपुर को कांग्रेस की पारंपरिक सीट बताते हुए कहा कि पार्टी अपने दावे से पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि गठबंधन में बिना आपसी सहमति के कोई दल इस सीट पर उम्मीदवार उतारता है, तो कांग्रेस भी अपना निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र होगी।

महागठबंधन के भीतर जारी इस विवाद पर सत्ता पक्ष ने भी निशाना साधा है। भाजपा के प्रवक्ता प्रभाकर मिश्रा ने कहा कि विपक्षी गठबंधन पहले अपने अंदर की लड़ाई सुलझाए, उसके बाद भाजपा को चुनौती देने की बात करे। वहीं जदयू के प्रवक्ता महेश दास ने भी कहा कि विपक्षी दलों के बीच तालमेल की कमी साफ दिखाई दे रही है।

गौरतलब है कि बांकीपुर विधानसभा सीट भाजपा विधायक नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद रिक्त हुई है। इस सीट पर भाजपा भी सक्रिय है और अजय आलोक, रणवीर नंदन तथा नील रतन घोष जैसे संभावित नामों पर विचार किया जा रहा है। हालांकि उम्मीदवार के नाम पर अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व करेगा।

उपचुनाव के लिए अधिसूचना जारी हो चुकी है और नामांकन प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। ऐसे में अब राजनीतिक हलकों की नजर इस बात पर टिकी है कि महागठबंधन आखिरकार किस दल को यह सीट देता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि राजद और कांग्रेस के बीच समय रहते सहमति नहीं बनती है, तो इसका सीधा लाभ विपक्षी दलों, विशेषकर भाजपा, को मिल सकता है। ऐसे में बांकीपुर उपचुनाव केवल एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं, बल्कि महागठबंधन की एकजुटता की भी बड़ी परीक्षा माना जा रहा है।

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