उत्तराखंड

अंकिता भंडारी मामले में आंदोलन तेज करने की चेतावनी, संघर्ष मंच ने सरकार और CBI पर उठाए सवाल

देहरादून। विभिन्न सामाजिक संगठनों ने अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने में हो रही देरी पर नाराजगी जताते हुए आंदोलन को और तेज करने का ऐलान किया है। अंकिता न्याय यात्

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2026-07-18
अंकिता भंडारी मामले में आंदोलन तेज करने की चेतावनी, संघर्ष मंच ने सरकार और CBI पर उठाए सवाल
अंकिता भंडारी मामले में आंदोलन तेज करने की चेतावनी, संघर्ष मंच ने सरकार और CBI पर उठाए सवाल

देहरादून। विभिन्न सामाजिक संगठनों ने अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने में हो रही देरी पर नाराजगी जताते हुए आंदोलन को और तेज करने का ऐलान किया है। अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच की ओर से आज आयोजित पत्रकार वार्ता में कहा गया कि यदि सीबीआई जांच में तेजी नहीं लाई गई और हाई कोर्ट में हत्यारों की जमानत रोकने के लिए मजबूत पैरवी नहीं की गई तो राज्यभर में लोग सड़कों पर उतरेंगे। मंच ने मांग की कि राज्य सरकार इस मामले में पूरी मजबूती से पैरवी करे और यह सुनिश्चित करे कि दोषियों की सजा किसी भी परिस्थिति में कम न हो तथा उन्हें जमानत न मिले।

पत्रकार वार्ता को निर्मला बिष्ट, सुजाता पॉल, मोहित डिमरी, उमा भट्ट, हरिओम पाली एवं विमला कोहली ने संबोधित किया।

निर्मला बिष्ट ने कहा कि 20 जुलाई को न्यायालय में मामले की सुनवाई निर्धारित है, जिसमें तीनों दोषियों द्वारा सजा कम करने और जमानत की मांग की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को पूरी मजबूती से पैरवी कर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि दोषियों की सजा कम न हो और उन्हें किसी भी प्रकार की राहत न मिले। उन्होंने यह भी कहा कि दूसरी ओर CBI जांच की धीमी गति गंभीर चिंता का विषय है। उत्तराखंड में रिजॉर्ट संस्कृति, नशे का कारोबार और बेटियों के सम्मान से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

सुजाता पॉल ने कहा कि मुख्यमंत्री के पद पर रहते हुए इस मामले में निष्पक्ष न्याय की उम्मीद करना कठिन है। उन्होंने कहा कि मंच लगातार यह सवाल उठा रहा है कि जिन लोगों के नाम कथित VIP एंगल में सामने आए हैं, जिनमें दुष्यंत गौतम, अजय कुमार तथा उर्मिला सनावर द्वारा लिए गए अन्य नाम शामिल हैं, उनसे अब तक CBI ने पूछताछ क्यों नहीं की। उन्होंने बुलडोजर चलाकर साक्ष्य नष्ट किए जाने के आरोपों की निष्पक्ष जांच की भी मांग की। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कुर्सी पर रहते निष्पक्ष जांच नही हो सकती इस लिए उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाया जाना चाहिए।

मोहित डिमरी ने कहा कि CBI को सार्वजनिक रूप से बताना चाहिए कि जांच आखिर किस चरण में पहुंची है। महीनों बीत जाने के बावजूद जांच की प्रगति पर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही है।
उमा भट्ट ने कहा कि 18 सितंबर को अंकिता भंडारी हत्याकांड के चार वर्ष पूरे हो जाएंगे। यदि उससे पहले CBI ने जांच पूरी कर दोषियों और कथित VIP एंगल पर ठोस कार्रवाई नहीं की, तो आंदोलन को और व्यापक एवं उग्र रूप दिया जाएगा।

हरिओम पाली ने राज्य सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को इस मामले में पूरी पारदर्शिता के साथ न्याय सुनिश्चित करना चाहिए और किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति को संरक्षण नहीं मिलना चाहिए।

विमला कोहली ने कहा कि अंकिता भंडारी के परिवार को न्याय दिलाना पूरे समाज की जिम्मेदारी है और सरकार को इस मामले में जवाबदेह होना होगा। पत्रकार वार्ता के दौरान त्रिलोचन भट्ट, मनीष केड़ियाल, एन. राघवेंद्र सहित अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच के अनेक सदस्य एवं सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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